वैसे तो काला बाजारी की समस्या हमारे देश में बहुत पहले से ही मौजूद रही है, किन्तु वर्तमान मे विश्व की जो स्थिति है, और हमारे देश में लॉकडाउन की स्थिति मे काला बाजारी की प्रवृत्ति और मुखर हो चुकी है! कुछ लोग जहां स्वेच्छा से दान कर रहे हैं, तो कुछ ऐसे लोग भी हैं जो मानवता विरोधी कार्य में सन्लिप्त है, इस विपरीत परिस्थिति का फायदा उठाकर मौजूदा संसाधनों का कालाबाजारी कर रहे हैं !जो समाज की आर्थिक असमानता को जन्म दे रही है
कालाबाजारी पे अंकुश लगाने के लिए प्रशासन को कड़ाई से पालन करना होगा!जैसे डी. एम., एस. डी. एम की अचौक निरिक्षण, खाद्ध पदार्थों की मूल्य सूची तैयार करा कर जगह जगह या दुकानो के बाहर चस्पा करा कर कालाबाजारी पे कुछ हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है,
गरीबों को राशन बाटने मे, बायोमेट्रिक्स पद्धति (मशीनों के द्वारा राशन वितरण, आधार कार्ड के हिसाब से राशन वितरण ताकि दोहराव से बचाव हो, ये छोटे छोटे नियम अपना कर कालाबाजारी से बचा जा सकता है!
अन्त मे यही कहूंगी
करो ना तुम कालाबाजारी
देशहित मे होगा ये भारी
इक्कीस दिन या कुछ और दिन मे
क्या तुम बन जावोगो बडे़ व्यापारी
करो ना तुम काला बाजारी
विश्व मे मानवता चीख रही है
हर तरफ मचा हाहाकार
कर सको ना अगर सहायता
करो ना तुम काला बाजारी
माना कुछ दिन है मुश्किल वक्त
छट जायेगा ये बादल भी
क्या दिखावोगे उन्को मुँह
जिससे करते तुम कालाबाजारी
करो ना तुम काला बाजारी!
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